Feeds:
Posts
Comments

Archive for June, 2010

वह बोला

मेरे खेतों में सोना है

मैं हँसी ये सोच कर कि

यह अक्ल से कितना बौना है

सोना होता,तो क्या इसके कपड़ों में

पैबन्द होता ?

वह भी तुरंत मुस्कराया

और बोला …….बहन जी ,

खेतों में नीचे का सोना तो सरकार का है

ऊपर धनवान का है

मुझे तो अपना सोच कर

सन्तुष्ट होना है

और रही पैबन्द की बात,

तो ये पैबन्द अब कपड़ों पर नहीं

बदन पर चिपके से लगते हैं

पर मैं सन्तुष्ट हूँ

कम से कम

इज्ज़त तो ढांके हैं .

वीणा

Read Full Post »

तुम नदी हो

बहो…….

बहना तो प्रकृति है

और तुम्हारी नियति भी

जो चाहो बहा कर ले जाओ

तिनका हो या काठ

मर्ज़ी तुम्हारी

तुम्हारा वेग तुम्हारा सम्बल है

और,अपने प्रिय सागर से

मिलने की आकुलता भी

इसी आकुलता ने

न जाने कितने पत्थर तराशे

और न जाने

कितने पत्थरों के बीच से

रास्ता तय किया

पर, भाग्य या दुर्भाग्य उन पत्थरों का

उनमें से कुछ तो शिवलिंग बन गए

और कुछ …

निरे पत्थर के पत्थर .

डा.वीणा

Read Full Post »