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Archive for the ‘Kavita’ Category

वह बोला

मेरे खेतों में सोना है

मैं हँसी ये सोच कर कि

यह अक्ल से कितना बौना है

सोना होता,तो क्या इसके कपड़ों में

पैबन्द होता ?

वह भी तुरंत मुस्कराया

और बोला …….बहन जी ,

खेतों में नीचे का सोना तो सरकार का है

ऊपर धनवान का है

मुझे तो अपना सोच कर

सन्तुष्ट होना है

और रही पैबन्द की बात,

तो ये पैबन्द अब कपड़ों पर नहीं

बदन पर चिपके से लगते हैं

पर मैं सन्तुष्ट हूँ

कम से कम

इज्ज़त तो ढांके हैं .

वीणा

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कृष्ण होली खेलने के लिए गलियों में निकलते हैं उन्हें देखते ही सारी गोपियाँ छुप जाती हैं लेकिन तभी एक कमसिन गोपी उनके हाँथ आ जाती है और वो उसी से होली खेलने लगते हैं. तो वह गोपी क्या कहती है…

बारी उमरिया है मोरी

ओ कान्हा मोसें खेलो न होली

रंग नहीं आवै ढंग नहीं आवे

आवै न मोहे जोरा जोरी

ओ कान्हा मोसें खेलो न होली

तोरे लाने मैं ल्याऊँ दई माखन

करनै परै न तोए चोरी

ओ कान्हा मोसें खेलो न होली

लेकिन कृष्ण नहीं मानते हैं अंत में परेशान होकर वो गोपी कहती है ….

जो तुम मोरी एकऊ न मानों

तो, होरी में जाये ऐसी होरी

आओ कान्हा खेलूं मैं होरी

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यामिनी…

भोर जागने को है,

पर उससे पहले जाग जाती है यामिनी
टूटे सपनों को बुहारती,

आँगन द्वार पूरती चौक हल्दी आटे से
भीगी धोती में लिपटी,

लटों से झरती ओस
फटकारती है जब जब

फूट पड़ती हैं किरणें पीली, नारंगी, सुनहरी
और… फूट पड़ता है अधर-कलियों से लोक गीत

चकिया की घरर-घरर पर थिरक-थिरक जाता है
तब ……… जुट जाती है दो जून की रोटी

और ढेर सारी आशाएं
चौका-पानी खेत-खलियान,

दौड़-भाग करती चकरघिन्नी सी
ठंडी नहीं होती चूल्हे की आग

कब सोयेगी यामिनी
क्या रात भर…………………….??

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सात समुन्दर पार चला बेटा करने को पढाई
ख़ुशी में उसकी खुश थे सब फूली मैं भी न समाई
कि आँखें भर भर आईं कि आँखें भर भर आईं

बाढ़े पूत पिता के धर्मं उत्तम भाग्य बनाये कर्मा
गर्व है बेटे पे जिसने खुद अपनी राह बनाई
कि आँखें भर भर आईं कि आँखें भर भर आईं

पूत कपूत तो का धन संचय पूत सपूत तो का धन संचय
न्योछावर ऐसे सपूत पे घर कि इक इक पाई
कि आँखें भर भर आईं कि आँखें भर भर आईं

जहाँ कुशल मृदु भाषी होते वहां पराये अपने होते
अपने इस गुण से तुम सबकी करना सदा भलाई
कि आँखें भर भर आईं कि आँखें भर भर आईं

लक्ष्य भेद करना है तुमको अर्जुन बनना होगा
माता पिता कि आशाओं पर खरा उतरना होगा
तभी सार्थक कहलाती है बेटा ये तरुनाई
कि आँखें भर भर आईं…..

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