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Posts Tagged ‘shadi’

उत्सव जीवन के अंग हुआ करते है । किसी न किसी बहाने हम उत्सव मनाते रहते हैं इससे हमारा मनोरंजन भी होता है। और साथ ही साथ हम समाज से परम्परा से जुडे़ भी रहते हैं । परन्तु उत्सव मनाने का बिल्कुल नया पहलू देखने को तब मिला जब हमारे ही पड़ोस में पीपल की शादी हुई । दो पीपल एक सूत्र में बंध रहे थे इस अवसर पर नाच-गाना व खाना-पीना हो रहा था। उस पीपल-जोडे़ के नीचे दो-तीन पहाड़ी परिवार रहते थे। न जाने उनको क्या सूझी कि पीपल के वृक्ष के विवाह का आयोजन कर डाला। पूरे विधि-विधान से विवाह हुआ। फिर सारी रात कच्ची मदिरा के मद मे चूर नाच-गाने मे मशगूल रहे।
सुबह सब शान्त था। विदाई का दिन था पर किसकी विदाई ? तभी देखा कि पास ही बनी कच्ची झोपड़ी की चैखट पर बैठी जवान कमला सिसकियां भर रही थी। अन्दर टूटी खाट पर बूढ़ा बाप खांस रहा था। मां को मरे कई वर्ष हो गए थे। झूठे बर्तन धोकर किसी तरह कमला दवा करा रही थी और सोच रही थी कि काश वो पीपल होती !

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